चार धाम यात्रा-हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

राज्य हाईकोर्ट की ओर से चार धाम यात्रा को लेकर दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए चुनौती दी है

Update: 2021-07-06 12:36 GMT

नई दिल्ली। उत्तराखंड सरकार ने राज्य हाईकोर्ट की ओर से चार धाम यात्रा को लेकर दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए चुनौती दी है। सरकार के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है।

मंगलवार को चार धाम यात्रा पर उत्तराखंड हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले को चुनौती देने के लिए उत्तराखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गई है। सरकार ने एक याचिका दायर करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार किए जाने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई से चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिले से चार धाम यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया था। लेकिन सरकार की ओर से लिए गए निर्णय पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके चलते सरकार को भी एसओपी में संशोधन करते हुए नई गाइडलाइन जारी करनी पड़ी थी। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चार धाम यात्रा को लेकर हुई सुनवाई के दौरान अधिकारियों को फटकार लगाते हुए पूछा था कि क्या हरिद्वार कुंभ के दौरान जो कुछ हुआ है उसी को चार धाम यात्रा में भी दोहराने दिया जाए? हाईकोर्ट ने कहा था कि जब कांवड़ यात्रा पर सरकार की ओर से रोक लगाई गई है। तब सरकार अपर्याप्त इंतजामों के साथ चार धाम यात्रा को शुरू करना क्यों चाह रही है? हाईकोर्ट ने कहा था कि उसे श्रद्धालुओं की भावनाओं का पूरा अहसास है और सरकार चारों धामों की पूजा के टीवी पर सजीव प्रसारण की व्यवस्था करें। सरकार की ओर से इस पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा गया कि यह शास्त्र सम्मत नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब शास्त्र लिखे गए थे तब टीवी नहीं होता था तो यह व्यवस्था कैसे दी जा सकती थी? कोर्ट ने कहा है कि जिस प्रकार उड़ीसा में जगन्नाथ यात्रा के सजीव प्रसारण की व्यवस्था की गई है वैसा ही इंतजाम यहां पर भी किया जाए। कोविड-19 के चलते चार धाम यात्रा इस साल शुरू नहीं हो पाई है। लेकिन देर सबेर यात्रा को शुरू करवाना और उसे सुचारू रखना भी सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। वहीं राज्य में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि वह यात्रा को जल्द से जल्द सुचारू करने के प्रयास करेंगे।

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