50 साल को ध्यान में रख कर बने योजनायें: योगी

विकास प्राधिकरणों में विधिक उत्तराधिकार/वसीयत की स्थिति में म्युटेशन फीस अधिकतम पांच हजार रूपये तक होनी चाहिए

Update: 2022-07-06 03:59 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनियोजित विकास की जरूरत पर बल दते हुये कहा परियोजनाओं का निर्धारण आगामी 50 वर्षों की स्थिति को ध्यान में रख कर किया जाना चाहिये। विकास प्राधिकरण, नगरीय निकाय, स्थानीय प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी किसी भी परिस्थिति में अवैध बस्तियां/रिहायशी कॉलोनी बसने न पाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिये कि लगातार प्रयासों से लखनऊ आज मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में अत्याधुनिक नगरीय सुविधाओं से लैस हो रहा है। 45 लाख से अधिक आबादी एलडीए की सीमा के भीतर निवास करती है। साल-दर-साल लखनऊ का विस्तार हो रहा है, मगर यह विकास अनियोजित है। इसे व्यवस्थित स्वरूप दिए जाने की आवश्यकता है। ऐसे में लखनऊ विकास प्राधिकरण के परिक्षेत्र को विस्तार दिया जाए। मेट्रोपोलिटन बोर्ड की तर्ज पर इस संबंध में वृहद कार्ययोजना तैयार कर यथाशीघ्र प्रस्तुत किया जाए।

उन्होने कहा कि विकास प्राधिकरणों में संपत्ति के नामांतरण की प्रक्रिया का सरलीकरण जरूरी है। वर्तमान में नामांतरण प्रभार सम्बंधित परिसंपत्ति का 1 प्रतिशत देय है, इसे कम किए जाने की आवश्यकता है। वर्तमान प्रक्रिया जटिल है, तकनीक के सहयोग से इसे और व्यवहारिक बनाया जाना चाहिए।

उन्होने कहा की विकास प्राधिकरणों में विधिक उत्तराधिकार/वसीयत की स्थिति में म्युटेशन फीस अधिकतम पांच हजार रूपये तक होनी चाहिए। फ्री होल्ड अथवा गिफ्ट संपत्ति के मूल्य के आधार पर अधिकतम 10 हजार रूपये का शुल्क लिया जाना चाहिए। लीज संपत्ति की स्थिति में 1 फीसदी म्युटेशन फीस ली जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्ति नामांतरण की प्रक्रिया जनहित गारंटी अधिनियम के अंतर्गत है। इसका ध्यान रखते हुए आम नागरिक के आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण किया जाना सुनिश्चित कराएं। लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर की विशिष्ट योजना को अगले 02 महीने में प्रारंभ करा दिया जाए। यह योजना लखनऊ को एक आकर्षक स्वरूप देने वाली होगी।

उन्होने कहा कि विकास प्राधिकरण, नगरीय निकाय, स्थानीय प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी किसी भी परिस्थिति में अवैध बस्तियां/रिहायशी कॉलोनी बसने न पाए। हर विकास प्राधिकरण/नगरीय निकाय में टाउन प्लानर की तैनाती की जाए। आईआईटी अथवा राज्य सरकार तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग लिया जाना चाहिए। परियोजनाओं का निर्धारण करते समय आगामी 50 वर्षों की स्थिति को ध्यान में रखें। हर कॉलोनी में सभी जरूरी सुविधाएं हों। अवैध कॉलोनियों को विकसित न होने दें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राधिकरण सीमान्तर्गत सभी आवासीय/निजी/शासकीय भवनों में रेन वॉटर हारवेस्टिंग को प्रोत्साहित किया जाए। इस संबंध में एक सुस्पष्ट नियमावली तैयार कर प्रस्तुत करें। विकास प्राधिकरणों द्वारा निवासियों से जल शुल्क लिए जाने में एकरूपता का अभाव है। अधिकांश विकास प्राधिकरणों द्वारा जल शुल्क नहीं लिया जा रहा है। कुछ विकास प्राधिकरणों जैसे लखनऊ व वाराणसी द्वारा अपने स्तर पर निर्धारित शुल्क पर जल शुल्क लिया जा रहा है। ऐसे में स्पष्ट जल शुल्क नियमावली की आवश्यकता है। इसे यथाशीघ्र तैयार किया जाए।

वार्ता

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