अब दिव्य व भव्य महाकाल मंदिर

माना जाता है कि उज्जैन में साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल, कालभैरव, गढ़कालिका और अर्ध काल भैरव

Update: 2022-10-10 21:00 GMT

नई दिल्ली। भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन के महाकाल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। महाकाल के दर्शन करने के बाद जूना महाकाल के दर्शन जरूर करना चाहिए। यह महाकाल प्रांगण में ही स्थित है। माना जाता है कि उज्जैन में साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल, कालभैरव, गढ़कालिका और अर्ध काल भैरव। यदि महाकाल बाबा और जूना महाकाल बाबा के दर्शन कर लिये हैं तो यहां के दर्शन भी जरूर करें। वर्तमान में जो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है, वह 3 खंडों में विभाजित है। निचले खंड में महाकालेश्वर, मध्य खंड में ओंकारेश्वर तथा ऊपरी खंड में श्री नागचन्द्रेश्वर मंदिर स्थित है।

श्रद्धालु महाकाल मंदिर के दर्शन जरूर करना चाहते हैं। कई लोगों का ये सपना साकार होता भी है, वहीं कई लोग आज भी दर्शन की आस में हैं। सावन के महीने में तो यहां अपार भीड़ होती ही है सामान्य दिनों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। हालांकि, शासन प्रशासन की तरफ से महादेव के भक्तों के लिए शिवार्चन की अच्छी व्यवस्था की गयी है लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर संकिर्ण हो जाता था। प्रधानमंत्री ने इसी प्रकार की समस्या काशी विश्वनाथ मंदिर में महसूस की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने काशी विश्वनाथ मंदिर में कारिडोर का निर्माण करवाकर काशी विश्वनाथ मंदिर को नव्य व भव्य रूप प्रदान कराया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से ही अब उज्जैन के महाकाल मंदिर को जा रहा है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल कॉरिडोर का 11 अक्टूबर, दिन मंगलवार को लोकार्पण होने वाला है। यह शुभ काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके बाद इस ऐतिहासिक कॉरिडोर को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि इस बीच एक दुखद घटना हो गयी। समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं पुर्व रच्छा मन्त्री मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया। इसके चलते कार्यक्रम में कुछ परिवर्तन भी हो सकता है लेकिन बाबा महाकाल मंदिर के कारिडोर का निर्माण तो हो ही चुका है।

उज्जैन नगरी में स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग, शिव जी का तीसरा ज्योतिर्लिंग कहलाता है। यह एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है । महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य आकर्षणों में भगवान महाकाल की भस्म आरती, नागचंद्रेश्वर मंदिर, भगवान महाकाल की शाही सवारी आदि है। प्रतिदिन अलसुबह होने वाली भगवान की भस्म आरती के लिए कई महीनों पहले से ही बुकिंग होती है। इस आरती की खासियत यह है कि इसमें ताजा मुर्दे की भस्म से भगवान महाकाल का श्रृंगार किया जाता है ।

बाबा की सुबह होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए पहले से बुकिंग की जाती है। महाकाल के दर्शन करने के बाद जूना महाकाल के दर्शन जरूर करना चाहिए। यह महाकाल प्रांगण में ही स्थित है। उज्जैन में साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल, कालभैरव, गढ़कालिका और अर्ध काल भैरव। यदि महाकाल बाबा और जूना महाकाल बाबा के दर्शन कर लिए हैं तो यहां के दर्शन भी जरूर करें। गर्भगृह में विराजित भगवान महाकालेश्वर का विशाल दक्षिणमुखी शिवलिंग है। इसी के साथ ही गर्भगृह में माता पार्वती, भगवान गणेश व कार्तिकेय की मोहक प्रतिमाएं हैं। गर्भगृह में नंदी दीप स्थापित है, जो सदैव प्रज्वलित होता रहता है। गर्भगृह के सामने विशाल कक्ष में नंदी की प्रतिमा विराजित है। उज्जैन का एक ही राजा है और वह है महाकाल बाबा। विक्रमादित्य के शासन के बाद से यहां कोई भी राजा रात में नहीं रुक सकता। जिसने भी यह दुस्साहस किया है, वह संकटों से घिरकर मारा गया।

हमारे देश में बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। सौराष्ट्र प्रदेश अर्थात गुजरात में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, घ्कारेश्वर अथवा ममलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्री भीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री र्त्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघृष्णेश्वर। हिंदुओं में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातरूकाल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

भारतीय संस्कृति की सनातन धर्म एवं 33 कोटि देवी देवताओं में भगवान शिव ही देवाधिदेव महादेव की उपमा से अलंकृत माने गए हैं। श्रावण मास भूतभावन भगवान शिव जी को समर्पित है। भगवान शिव की अर्चना के लिए श्रावण मास अति विशिष्ट माना गया है जिसमें भगवान शिवजी की आराधना विशेष फलित होती है। शिवालय सर्वत्र प्रतिष्ठित हैं जिनके दर्शन मात्र से ही आलोक एक शांति की प्राप्ति होती है। उत्तर प्रदेश के काशी में बाबा काशी विश्घ्वनाथ के साथ ही बारहों शिव के स्घ्वरूपों के ज्घ्योतिर्लिंग विद्यमान माने गए हैं। इनमें पहले स्थान पर सोमनाथ महादेव मान मंदिर, दूसरे स्थान पर मल्लिकार्जुन महादेव सिगरा, तीसरे स्थान पर महाकालेश्वर महादेव दारानगर, चौथे स्थान पर केदारनाथ महादेव केदार घाट, पांचवें स्थान पर भीमशंकर महादेव नेपाली खपड़ा, छठवें स्थान पर विश्वेश्वर महादेव विश्वनाथ गली, सातवें स्थान पर त्रंबकेश्वर महादेव हौज कटोरा बांस फाटक, आठवें स्थान पर बैजनाथ महादेव बैजनत्घ्था, नौवें स्थान पर नागेश्वर महादेव पठानी टोला, दसवें स्थान पर रामेश्वरम महादेव रामकुंड, 11वें स्थान पर घुश्घ्मेश्घ्वर महादेव कमच्घ्छा और 12वें स्थान पर ओंकारेश्वर महादेव छित्घ्तनपुर में मौजूद हैं। काशी में 50 से अधिक शिव मंदिर या शिवालय सिद्ध माने गए हैं। जिनमें ओम्कारेश्वर पठानी टोला, त्रिलोचनेश्वर- त्रिलोचन, आदि महादेव-त्रिलोचन महादेव के पीछे, कृतिवासेश्घ्वर महादवेव-हर तीरथ, रत्नेश्वर महादेव- वृद्ध काल, चंदेश्वर-सिद्धेश्वरी, केदारेश्वर-केदार घाट, धर्मेश्वर मीरघाट, वीरेश्वर सिंधिया घाट के ऊपर, कामेश्वर-त्रिलोचन के उत्तर, विश्वकर्मेश्वर-गोलगड्डा, मणि कर्णेश्घ्वर-गोमठ आश्रम, अविमुक्तेश्वर- धर्मशाला विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र, विश्घ्वेश्घ्वर- विश्व प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर, अमृतेश्वर-नीलकंठ महादेव, तारकेश्वर ज्ञानवापी के पूर्व गौरीशंकर मढ़ी के नीचे, ज्ञानेश्वर-लाहौरी टोला, करुणेश्वर-ललिता घाट के ऊपर, मोक्षद्वारेश्घ्वर - करुणेश्वर के समीप, स्वर्गद्वारेश्वर-ब्रह्मनाल के समीप, ब्रह्मेश्वर-खालिसपुर बंगाली टोला, लांगलीश्घ्वर-खोवा बाजार, वृद्धकालेश्वर- महामृत्युंजय परिसर दारानगर, वृषेश्घ्वर- गोरखनाथ टीला मैदागिन, चंडीश्वर- सदर बाजार चंडी देवी के समीप, नंदिकेश्वर- ज्ञानवापी पर लुप्घ्त, महेश्वर-मणिकार्णिका कुंड के पूर्वी तट पर, ज्योति रूपेश्घ्वर-गोमठ, शैलेश्वर -मढियाघाट शैलपुत्री, संगमेश्वर - आदिकेशव वरुणा में, स्घ्वर्लीनेश्घ्वर- नया महादेव, प्रहलाद घाट, मध्यमेश्वर-दारानगर, हिरण्यगर्भेश्घ्वर-त्रिलोचन त्रिलोचन घाट, ईशानेश्घ्वर बांस फाटक, गोप्रेक्षेश्वर-लालघाट, वृषभेश्वर-कपिलधारा, उपशांतेश्वर-पठानी टोला, ज्घ्येष्घ्ठेश्घ्वर- काशीपुरा, निवासेश्वर-भूत भैरव के पास काशीपुरा, शुक्रेश्वर-कालिका गली, व्याघ्रेश्वर-भूत भैरव, जंबुकेश्वर-बड़ा गणेश, महामृत्युंजय- मध्घ्यमेश्घ्वर दारानगर, नए विश्वनाथ-मीर घाट, नए विश्वनाथ-बीएचयू परिसर, बैजनाथ-बैजनत्घ्था, जंगम-जंगम बाड़ी मठ, मल्लिकार्जुन-सिगरा, भीमशंकर-नेपाली खपड़ा, र्त्यंबकेश्घ्वर- हौज कटोरा बांस फाटक, नागेश्वर-पठानी टोला, रामेश्वरम-रामकुंड, घुश्मेश्वर- कमच्घ्छा, ओमकारेश्वर- छित्घ्तनपुर और इसके अतिरिक्त पंचक्रोशी मार्ग में पड़ने वाले अनेक शिव मंदिर की महत्ता मानी गई है। (हिफी)

Tags:    

Similar News