बिलकिस बानो गैंगरेप के दोषियों की रिहाई के आदेश को SC ने किया रद्द

गुजरात दंगों में गैंगरेप का शिकार बिलकिस बानो के दोषियों को सरकार के रिहा करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया

Update: 2024-01-08 05:40 GMT

नई दिल्ली। 2002 के गुजरात दंगों में गैंगरेप का शिकार हुई बिलकिस बानो और उसके परिवार के लोगों की हत्या करने वाले 11 दोषियों को गुजरात सरकार के रिहा करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने आज रद्द कर दिया।

गौरतलब है कि गुजरात में 2002 में दंगा हुआ था। इस दंगे के दौरान 11 लोगों ने मिलकर तब 21 साल की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ 11 लोगों ने मिलकर गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था। जिस समय बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप की घटना हुई थी उस समय बिलकिस बानो 5 महीने की गर्भवती भी थी। आरोपियों ने बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप की घटना के साथ-साथ उसके परिवार के सात लोगों की भी हत्या कर दी थी जिसमें उसकी एक 3 साल की बेटी भी थी।

इस मामले में ट्रायल के बाद कोर्ट ने 11 दोषियों जसवंत भाई नाई, गोविंद भाई नाई, राधे श्याम शाह, बिपिन चंद्र जोशी, शैलेश भट्ट ,मितेश भट्ट, प्रदीप मोरधिया, बाकाभाई, राजू भाई, केसरभाई को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इन दोषियों की सजा को बरकरार रखा था लेकिन 2022 में गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो गैंग रेप के मामले में उम्र कैद की सजा पाए गए सभी दोषियों को रिहा कर दिया था।

दोषियों की रिहाई के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को चुनौती दी गई थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के 11 दोषियों की रिहाई के गुजरात सरकार के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि गुजरात सरकार को रिहाई करने का अधिकार नहीं था।

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