कोर्ट की दो टूक- जेल में बंद नेताओं को नहीं दे सकते प्रचार की छूट

हत्या के आरोपी तक आचार्य संहिता लगने से पहले अपनी पार्टी बना लेंगे और इलेक्शन में कैंपेन करेंगे।

Update: 2024-05-01 08:10 GMT

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव- 2024 के अंतर्गत विभिन्न मामलों में जेल में बंद नेताओं को चुनाव प्रचार के लिए छूट देने वाली मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही अदालत ने इस डिमांड पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा है कि हम चुनाव आयोग को जेल में बंद नेताओं को चुनाव प्रचार की इजाजत का आदेश नहीं दे सकते हैं। क्योंकि ऐसी परमिशन देना बहुत ही रिस्की और खतरनाक होगा। यदि जेल में बंद नेताओं को चुनाव प्रचार की छूट दी जाती है तो दाऊद जैसे लोग भी अपनी पार्टी बनकर चुनाव प्रचार की छूट मांगेंगे।

बुधवार को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की बेंच ने जेल में बंद नेताओं को भी चुनाव प्रचार करने की अनुमति मिलने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि ऐसा आदेश हम चुनाव आयोग को नहीं दे सकते हैं, क्योंकि जेल में बंद नेताओं को चुनाव प्रचार की अनुमति देना तो बहुत रिस्की एवं खतरनाक होगा।

अदालत ने अर्जी को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी परमिशन देने पर जेल में बंद खतरनाक अपराधी भी चुनाव से पहले अपनी पार्टी बना लेंगे और उसके लिए चुनाव प्रचार हेतु अनुमति देने की मांग करेंगे।

याचिका दाखिल करने वाले अमरजीत गुप्ता के वकील से जस्टिस मनमोहन ने कहा कि ऐसे तो दाऊद इब्राहिम भी अपनी पार्टी बनाकर इलेक्शन में उतरेगा, क्योंकि वह कहेगा मैं दोषी नहीं हूं। हम ऐसे किसी व्यक्ति को चुनाव प्रचार की परमिशन नहीं दे सकते हैं जो किसी भी तरह के मामले को लेकर जेल में बंद है। यदि ऐसे लोगों को चुनाव कैंपेन की परमिशन दी जाती है तो सारे रेपिस्ट एवं हत्या के आरोपी तक आचार्य संहिता लगने से पहले अपनी पार्टी बना लेंगे और इलेक्शन में कैंपेन करेंगे।

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