लिपिक का कारनामा-जज के फर्जी हस्ताक्षर कर 2 कैदियों को कराया रिहा

जज के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए लिपिक ने 2 कैदियों को रिहा करा दिया। इस मामले का भंडाफोड़ होने पर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

Update: 2021-07-24 12:59 GMT

एटा। एक लिपिक ने अपनी कारगुजारी दिखाते हुए न्यायपालिका को ही शर्मसार कर दिया है। जज के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए लिपिक ने 2 कैदियों को रिहा करा दिया। इस मामले का भंडाफोड़ होने पर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर ली गई है।  

पॉक्सो एक्ट के आरोपियों को रिहा कराने के लिए न्यायालय के एक लिपिक ने कोर्ट के फर्जी आदेश बना लिए और उसके ऊपर जज के फर्जी हस्ताक्षर करते हुए कैदियों को रिहा करा दिया। जब यह मामला सामने आया तो कोर्ट में हड़कंप मच गया। दरअसल मनोज कुमार नामक लिपिक विशेष न्यायालय के न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम में तैनात है। आरोप है कि मनोज कुमार ने न्यायाधीश कुमार गौरव के फर्जी हस्ताक्षर बनाए और फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेजों के माध्यम से कारागार में निरुद्ध आरोपी उमेश कुमार निवासी लोधई थाना सहपत को रिहा करवा लिया। उमेश कुमार थाना सहपत जिला हाथरस का रहने वाला है जिसे वर्ष 2020 की 7 नवंबर को रिहा कराया गया था। उमेश पर किशोरी के साथ दुराचार करने के आरोप मंे पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। इसके अलावा लिपिक मनोज कुमार के ऊपर थाना कोतवाली देहात निवासी विकास बघेल को वर्ष 2020 की 9 दिसंबर को जज के फर्जी हस्ताक्षर से आदेश तैयार कर रिहा कराने का आरोप है। लिपिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद न्यायिक कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। विकास बघेल पर दुष्कर्म के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज है। न्यायाधीश के फर्जी हस्ताक्षर के बाद लिपिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने से न्यायिक कर्मचारियों में तमाम चर्चाएं हैं। उधर इस मामले में एसएसपी एटा उदय शंकर सिंह ने बताया है कि न्यायिक कर्मचारी की तहरीर के आधार पर 22 जुलाई को एक कर्मचारी के खिलाफ दो और रिपोर्ट दर्ज की गई है। दोनों मामलों की जांच शुरू करा दी गई है।

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