महीनों की मेहनत- पब्लिक का प्यार- मंच पर भावुक हुए राकेश

सम्मलेन में उमड़ी भीड़ को देखने के पश्चात राकेश शर्मा की काबिलियत की मुख्य अतिथियों ने भी जमकर तारीफ की

Update: 2021-10-01 13:12 GMT

मुजफ्फरनगर। 19 सितम्बर 2021 को जीआईसी मैदान में ब्राहमण सम्मेलन किया गया था। इस सम्मेलन का नेतृत्व वरिष्ठ सपा नेता राकेश शर्मा कर रहे थे। राकेश शर्मा ब्राहमण सम्मेलन को कामयाब करने के लिये डेढ़ महीने से दिन-रात क्षेत्रों में जाकर लोगों से मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में पहुंचने का आह्वान कर रहे थे। यह राकेश शर्मा का व्यवहार ही था, जो भारी संख्या में पब्लिक को सम्मलेन में खींच लाया था। इस नेता की खास बात यह है कि एक बार मिले व्यक्ति को दूर से ही पहचान लेता है और सम्मान के साथ पुकारता है। जब मंच पर आये राकेश शर्मा ने सम्मेलन में हिस्सा लेने आई भीड़ की और देखा तो वह भावुक हो गये। सम्मलेन में उमड़ी भीड़ को देखने के पश्चात राकेश शर्मा की काबिलियत की मुख्य अतिथियों ने भी जमकर तारीफ की।


जनपद मुजफ्फरनगर में सदर विधानसभा सीट से निवास करने वाले वरिष्ठ सपा नेता राकेश शर्मा की बात करते हैं। 19 सितम्बर को जीआईसी मैदान में ब्राहमण सम्मेलन किया गया। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में माता प्रसाद पांडेय व सपा राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा आये हुए थे। अपने समाज का सम्मेलन आयोजित करने के लिये राकेश शर्मा लगभग डेढ महीने पहले ही तैयारियों में जुट गये थे। राकेश शर्मा ने ब्राहमण सम्मेलन के लिये डेढ़ महीने तक दिन-रात एक कर दिये थे। उन्होंने जनपद के क्षेत्रों में जाकर ब्राहमण समाज से सम्पर्क करते हुए उनसे सम्मेलन मेें जुटने के लिये निरंतर आह्वान किया। राजनीति के जानकार लोग उनकी डेढ़ महीने की इस मेहनत पर आशंकित थे कि कितनी भीड़ राकेश शर्मा जुटा पायेंगे। राकेश शर्मा को अपने और समाज के ऊपर विश्वास था, इसी लिहाज से मुजफ्फरनगर के महावीर चौक के निकट स्थित जीआईसी के मैदान लोगों के पर्याप्त संख्या में बैठने की व्यवस्था की गई थी। ब्राहमण समाज के लोगों ने भी उनके विश्वास को ठेस नहीं पहुंचने दी, जिसके चलते राजनीति के जानकार लोग भी ब्राहमण सम्मेलन में उमड़ी समाज की भीड़ को देखकर दातों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गये थे।


राकेश शर्मा जब तक मंच पर पहुंचे नहीं थे लेकिन राकेश शर्मा के फोटो हाथ में लेकर ब्राहमण समाज के युवाओं ने राकेश शर्मा जिंदाबाद के नारों से पंडाल को गूंजा रखा था। यही नहीं बल्कि जो युवा इस सम्मेलन में हिस्सा लेने आये थे, उनकी टी-शर्ट पर राकेश शर्मा की फोटो छपी हुई थी और ट्रेक्टर-ट्रालियों पर भगवान परशुराम का ध्वज और राकेश शर्मा के फोटो लगे हुए थे। जब राकेश शर्मा मुख्य अतिथियों के साथ मंच पर पधारे तो पब्लिक का उत्साह बढ़ गया और राकेश शर्मा के जिंदाबाद के नारों की आवाज और दोगुना हो गई। जब राकेश शर्मा मंच पर आये तो उन्होंने आते ही देखा कि उनके आह्वान कितनी भीड़ सम्मेलन में आई और कैसे उनके नारे लगाकर उन्हें प्यार दे रही है। इस प्यार को देख वरिष्ठ सपा नेता भावुक हो गये और वह अपने आप को रोक नहीं पाये। शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि उनके प्यार में इतनी पब्लिक आयेगी क्योंकि इस सम्मलेन में पंडाल फुल हो गया था। इसके बाद पंडाल के चारों और लोग राकेश शर्मा को सुनने के लिये खडे़ हो गये थे। खचाखच भरे ब्राहमण महासम्मलेन के मंच से राकेश शर्मा को समाज के वरिष्ठ लोगों की ओर से पगड़ी पहनाई गई। भीड़ के लिहाज से जैसी उम्मीद लगाई जा रही थी, उस कसौटी पर खरे उतरते हुए राकेश शर्मा अपने समाज के लोगों को अकेले अपने दम पर जिला मुख्यालय तक खींचकर लाने में कामयाब रहे। राकेश शर्मा के प्रति पब्लिक के प्यार को देखते हुए मुख्य अतिथियों ने उनकी पीठ थपथपाई थी।


ब्राहमण सम्मेलन में यह भीड़ यूं ही नहीं देखने को मिली थी क्योंकि उनका व्यवहार ही कुछ ऐसा है। इस नेता की खास बात यह है कि काफी भीड़ होने के बाद राकेश शर्मा सबको पहचान रहे थे और उनका हालचाल पूछ रहे थे। अक्सर सम्मेलन में देखा गया कि राकेश शर्मा नाम से लोगों को पुकार रहे थे। अगर अन्य नेताओं की बात की जाये, तो नेता अपने प्रोग्राम में इतने व्यस्त होते हैं कि बस दूर-दूर से ही हाथ हिलाकर निकल जाते हैं और उन्हें आई हुई जनता का नाम नहीं पता होता है। लेकिन कुछ नेता ऐसे भी होते हैं चाहे भीड़ कितनी ही हो वह एक दम दूर से पूरी पब्लिक को जानते हैं। ऐसे नेताओं में राकेश शर्मा का भी नाम लिया जा सकता है। अपने क्षेत्र की जनता के नाम वो ही जानता होगा जो निरंतर उनके सम्पर्क में रहते हुए वार्तालाप करता रहता होगा। पब्लिक भी ऐसा ही नेता चाहती है जो उन्हें नाम से जाने और उनके बीच रहकर कार्य कर सके। ब्राहमण समाज की रिकॉर्ड-तोड़ भीड़ की सफलता ने राकेश शर्मा का कद और ऊंचा कर दिया है। मानें तो विधायक और एमपी न रहते हुए भी उनके सम्मेलन में एक विधायक और एमपी के प्रोग्राम से भीड़ अधिक थी।



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