अंधविश्वास में फंसी पब्लिक

अंधविश्वास में फंसी पब्लिक

चुटिया काटने की अफवाहों के बीच कुछ तथाकथित धर्मगुरुओं ने आम जनता में फैलाई दहशत , घरों के दरवाजों पर लगवाए ताबीज,तांत्रिकों की आई मौज
यह अफवाह है जनता ध्यान ना दे
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश हरियाणा राजस्थान और दिल्ली सहित कई राज्यों में पिछले 2 हफ्तों से चोटियाँ काटने की घटनाएं सामने आ रही है अब यह घटनाएं मुजफ्फरनगर जनपद के आसपास भी होने लगी है दरअसल चोटियाँ काटने की घटनाएं केवल वह महिलाएं कर रही जो पारिवारिक विवाद, अपने घर और ससुराल में दबाव बनाना चाहती है तथा कई तांत्रिकों ने भी साजिशन ऐसी घटनाएं कराई है सूत्रों का कहना है कि कुछ महलाएँ और लड़कियां जो विभिन्न कारणों से तांत्रिकों के फेर में फंसी है उनको तांत्रिकों ने चोटियाँ काटने को कहा अब उनके सामने चोटी काटने के बाद परिजनों को चोटी कैसे कटी का कारण बताना ना पड़े इसलिए भूत प्रेत की कहानी गढ़ दी जा रही है कई अन्य कारण भी हैं जिन को लिखना सही नहीं समझा जा सकता आम जनता यह भी समझने को तैयार नहीं है की चोटियाँ काटने से किसी का क्या फायदा हो सकता है भूत-प्रेत के चक्करों में फंसाने के लिए कई तांत्रिक भी सक्रिय हो गए हैं और वह ऐसी महिलाओं पर भूत प्रेत की बात कहकर अवैध वसूली में जुट गए हैं अंधविश्वास को बढ़ावा देने में कुछ तथाकथित धर्मगुरु भी जुड़ गए हैं मुजफ्फरनगर के खालापार सहित मोहल्लों व शेरपुर सहित कई अन्य गांवों में कुछ तथाकथित धर्म गुरुओं ने लोगों को एक ताबीज बनाकर बांटना शुरु कर दहशत फैलाने शुरू कर दी है घरेलू महिलाएं डरी हुई है और उन्होंने अपने घरों के दरवाजे पर यह ताबीज चस्पा कर लिए हैं आम जनता को इस तरह की अंधविश्वास को दरकिनार कर अफवाहों पर ध्यान नही देना चाहिए
जिस में कुरआन की एक आयत लिखी है और कुछ उर्दू में रियाज़ी के नम्बर लिखे है।
लोगों का कहना है कि ये तावीज़ आप अपने घर के दरवाजे पर चस्पा कर दे, जिससे कोई भी शैतानी बला आप के घर के अंदर दाखिल नही होगी और आप की औरतों की चोटी महफूज़ रहेगी।
अब सवाल ये पैदा होता है कि जिस कुरआन की आयत इस तावीज़ में लिखी है, वही पूरा कुरआन तो आप के घर के अंदर भी रखा है।वो बहुत बदनसीब मुसलमान होगा जिस के घर कुरआन जैसी मुक़द्दस किताब न होगी।
99% परशेंट मुसलमानों के घर कुरआन है, जब घर मे कुरआन है तो फिर इस एक आयत को घर के दरवाजे पर चस्पा करने की क्या ज़रूरत है..?
और हाँ कुरआन कोई ऐसी किताब नही की उसे पानी मे घोल कर पिया जाए, या तावीज़ बना के लटकाया जाए, या उस की आयतों को कागज़ पर लिख कर दीवारों पे चस्पा किया जाए।
कुरआन तोे गौर-ओ-फिक्र करने की तलक़ीन देता है अच्छाई और बुराई में फ़र्क़ समझाता है, लोगो को सीधी राह दिखाता है, सच्चाई से अवगत कराता है, जीने के उसूल बताता है, गुमराही और अंधविश्वास से बचाता है।
इसलिये सभी से दरख़्वास्त है कि ऐसी घटनाओं पर ध्यान ना दे

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