कप्तान अभिषेक की पहल-34 साल में पहली बार मना एसआई प्रमोद का 'बर्थ-डे'

कप्तान अभिषेक की पहल-34 साल में पहली बार मना एसआई प्रमोद का बर्थ-डे

मुजफ्फरनगर। जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस अभिषेक यादव की 'हैप्पी बर्थ-डे' मुहिम लगातार पुलिस का मनोबल बढ़ा रही है। इस अभियान के सहारे पुलिस कर्मियों को जहां थानों में एक पारिवारिक माहौल देकर तनाव से उभारने और खुशी के नजदीक ले जाने का प्रशंसनीय प्रयास किया गया है, वहीं 'बर्थ-डे' अभियान ने पुलिस कप्तान को कर्मचारियों के साथ एक अभिभावक के रूप में जोड़ने का काम किया है। इस अभियान से ऐसे किस्से भी निकलकर सामने आ रहे हैं, जो भावनात्मक भी हैं और प्रेरणादायी भी बने हैं। ऐसे ही एक मामले में 1 नवम्बर 2019 को चरथावल थाने में एसएसआई प्रमोद गिरी की 'बर्थ-डे' पार्टी अनोखी रही। पुलिस सर्विस के 33 साल बिताने के बाद 34वें साल में उनको अपना जन्मदिन यादगार रहा। जन्म से आज तक कभी भी जन्म दिन नहीं मनाने वाले प्रमोद गिरी जीवन में अपना पहला जन्मदिन इसलिए मना पाये कि उनके कप्तान ने जनपद में निचले स्तर के पुलिस कर्मचारियों के लिए अभिभावक बनकर दिखाया है। वे कहते हैं, ''आज पुलिस कप्तान की इस पहल से पहली पायदान के पुलिस कर्मियों में खुशी बनी हैं।''





बता दें कि आईपीएस अभिषेक यादव ने मुजफ्फरनगर में एसएसपी के पद पर कार्यभार ग्रहण करने के बाद पुलिस कप्तान व कर्मियों के बीच की दूरी को कम करने पर जोर दिया और इसके लिए उन्होंने जनपद में 'मोटिवेशनल पुलिसिंग' को लागू करने के साथ ही पुलिस कर्मियों को एक पारिवारिक माहौल देने और भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए 'हैप्पी बर्थ डे' मुहिम को शुरू किया। इसके सार्थक परिणाम भी सामने आये हैं। आज थानों में 'हैप्पी बर्थ डे टू यू' पूरे उत्साह और उमंग के साथ गूंजता नजर आता है। खुद पुलिस कर्मियों का हौसला बढ़ाने के लिए थानों में जाकर पुलिस कप्तान अभिषेक यादव उनका बर्थ डे मना रहे हैं। कोई भावनाओं के समुद्र में बहकर खुश है तो कोई खुद को आज कप्तान अभिषेक की 'फेमिली पुलिसिंग' से जुड़ा पाकर प्रसन्न है। इस अभियान के दौरान ऐसे कई किस्से हैं, जो प्रेरणा बन गये हैं। ऐसा ही एक बर्थ डे शुक्रवार को चरथावल थाना परिसर में मनाया गया। यहां थाना प्रभारी सूबे सिंह ने अपने एसएसआई उप निरीक्षक प्रमोद गिरी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया। सिपाही के रूप में यूपी पुलिस का अंग बने प्रमोद गिरी को 2012 में उप निरीक्षक के रूप में प्रमोट किया गया। प्रमोद गिरी एक साधारण परिवार से जुड़े होने के कारण जन्मदिन और ऐसी प्रथा से हमेशा ही दूर रहे। शिक्षा के बाद नौकरी की तलाश यूपी पुलिस की सफल भर्ती पर आकर खत्म हो गयी और इसके बाद से यूपी पुलिस की सर्विस में 34 साल बिताने वाले प्रमोद गिरी ने लगातार 'फेयर पुलिसिंग' की। पुलिस को एक परिवार मानकर 'सत्यमेव जयते' को उद्देश्य बनाकर नौकरी करने वाले प्रमाद गिरी बताते हैं कि उन्होंने अपने नुकसान की परवाह करने के बजाये इस बात की चिंता की कि उनके हाथ से किसी भी निर्दोष को सजा नहीं मिल पाये। उनके सामने अनेक बार ऐसी विवेचना आयी, जिसमें आपसी रंजिश में झूठे आरोप लगाकर निर्दोषों को नामजद कराया गया था। उन्होंने इन निर्दोषों को बचाने के लिए काम किया और 'फेयर पुलिसिंग' कर आत्म संतुष्टि हासिल की। वह बताते हैं, कि जब वह फुगाना में उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे तो उनके सामने गांव खरड़ का एक प्रकरण आया। इसमें एक लड़के को आरोपी बनाया गया था। धारा 313 में दर्ज इस मुकदमे में आरोपी लड़के की बहन और बहनोई को भी नामजद किया गया। विवेचना में इस मुकदमे में धारा 304 की वृद्धि की गयी, लेकिन जब उनके सामने यह तथ्य आया कि बहन और बहनोई का इस मुकदमे से कोई वास्ता नहीं है तो उन्होंने इन मुल्जिमों को बचाने का काम किया। इसी प्रकार बुढ़ाना थाना में तैनाती के दौरान एक भू माफिया ने उन पर एक मुकदमे की विवेचना के दौरान निर्दोष लोगों को फंसाने का दबाव बनाया।





राजनीतिक लोगों तक भी मामला पहुंचा, लेकिन वह अपने उद्देश्य पर अडिग रहे और किसी भी निर्दोष को मुकदमा में शामिल नहीं किया गया। उप निरीक्षक प्रमोद गिरी अपने प्रमोशन के बाद से ही मुजफ्फरनगर जनपद में तैनात हैं। इस दौरान उन्होंने फुगाना थाना में सबसे ज्यादा समय बिताया। इसके अलावा वह बुढ़ाना, तितावी, छपार, रतनपुरी और छपार थाना में तैनात रहे। तितावी में रहने के दौरान वह बघरा पुलिस चौकी के इंचार्ज भी रहे। 18 अक्टूबर 2019 को ही उनको कप्तान अभिषेक ने चरथावल थाने में एसएसआई पद पर तैनात किया है।





प्रमोद गिरी कहते हैं, पुलिस कप्तान अभिषेक यादव ने मुजफ्फरनगर पुलिस में एक पारिवारिक माहौल पैदा करने का सराहनीय काम किया है। मैं ग्रामीण परिवेश के एक साधारण परिवार का अंग रहा हूं, ऐसे में अपना जन्म दिन मनाने की कभी सोच भी नहीं पाया। पुलिस सर्विस में उनका यह 34वां वर्ष है और 34 साल के बाद एसएसपी की पहल पर उन्होंने अपना थाने में जन्म दिन मनाया।






जन्मदिन के लिहाज से उनके जीवन का यह पहला जश्न था। इसके लिए वह अपने थाना स्टाफ के साथ पुलिस कप्तान के भी आभारी हैं। उनका कहना है कि एसएसपी साहब की यह पहल काफी अच्छी है। इसने पुलिस के निचले स्तर के कर्मचारियों में एक उत्साह पैदा करने के साथ ही उनको खुशी के कुछ पल दिये हैं। प्रमोद गिरी पुलिस को ही अपना परिवार मानते हैं, उनका कहना है कि पुलिस कर्मचारी जनता के दुख दर्द में खड़े नजर आते हैं तो थाना और चौकी का अपना स्टाफ ही एक परिवार की तरह हमारे साथ खड़ा होता है। प्रमोद गिरी कहते हैं कि एसएसपी का यह अभियान निश्चित ही प्ररेणादायी पहल है और इससे पुलिस कर्मियों में खुशी का वातावरण बना हुआ है। वह कभी सोच भी नहीं सकते थे कि इस तरह से सर्विस में रहते हुए जन्म दिन मना पायेंगे और पार्टी के साथ उनको अपने कप्तान का 'मोटिवेशनल पुलिसिंग' का बधाई संदेश भी प्राप्त होगा।

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