खुद गाड़ी चलाकर, गुपचुप मुजफ्फरनगर पहुंचे जयंत चौधरी,पीड़ितों से मिलकर बांटा दर्द

खुद गाड़ी चलाकर, गुपचुप मुजफ्फरनगर पहुंचे जयंत चौधरी,पीड़ितों से मिलकर बांटा दर्द

मुजफ्फरनगर जनपद के शहर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान पीड़ित और मृतक युवक के परिजनों से मिलने आने के दौरान बुधवार को रोके गये रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी गुपचुप तरीके से गुरूवार की सुबह शहर के प्रभावित क्षेत्र खालापार में मृतक नूरा के घर पर पहुंचे और अन्य पीड़ितों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सरकार को निष्पक्ष कार्रवाई से जनता के बीच विश्वास बहाल करने के लिए भेदभावमुक्त कदम उठाने चाहिए। रालोद पीड़ितों के साथ है। उन्होंने कहा कि मृतक का परिवार बेहद गरीब है और उसकी मदद पार्टी से करने के साथ ही सरकार पर भी हम संघर्ष के सहारे दबाव बनायेंगे। उन्होंने कहा कि उनको बीते दिन पुलिस प्रशासन ने जबरन रोका था, जबकि वह अपने परिवार अपने घर आ रहे थे।

बता दें कि शहर में 20 दिसम्बर की व्यापक हिंसा के बाद पुलिस कार्रवाई में कई निर्दोष लोगों को भी पकड़ा गया है। इसके साथ ही इस हिंसा में गोली लगने के कारण दक्षिणी खालापार निवासी नूर मौहम्मद पुत्र स्व. इकराम की मौत हो गयी थी। नूर मौहम्मद बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। बुधवार को रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी नूर मौहम्मद के परिजनों से मिलने के लिए मुजफ्फरनगर आ रहे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनको कार्यकर्ताओं की भीड़ के साथ खतौली नहर पर ही रोक लिया था। घंटों की जद्दोजहद के बाद भी जयंत चौधरी को आगे नहीं जाने दिया गया। वह कल वही से लौट गये थे। उसी दौरान उन्होंने पुलिस प्रशासन के सामने ही गुरूवार को खालापार आने का ऐलान कर दिया था। पुलिस प्रशासन ने आज भी जयंत चैधरी को रोकने के लिए घेराबन्दी की थी, लेकिन पुलिस की तमाम नाकाबंदी को ध्वस्त करते हुए पार्टी लीडरों को भी जानकारी दिये बिना जयंत चौधरी दिल्ली से अलसुबह ही मुजफ्फरनगर के लिए निकले और पौने आठ बजे दक्षिणी खालापार में मृतक युवक नूर मौहम्मद के घर पर पहुंच गये थे। उनके साथ पार्टी के नेता शाहिद सिद्दीकी और वीरपाल मलिक भी थे। दिल्ली से जयंत चौधरी खुद कार चलाकर यहां पहुंचे थे। सुबह सवेरे ही जयंत चौधरी को अपने बीच पाकर पीड़ित परिवार भी भावुक हो गया। मृतक नूर मौहम्मद के परिजनों ने जयंत चैधरी को बताया कि नूर का प्रदर्शन से कोई मतलब नहीं था। वह नमाज पढ़कर लौट रहा था, कि गोली मार दी गयी। नूर मौहम्मद की मौत के बाद प्रशासन ने भी परिजनों को परेशान किया और उसको दफन के लिए भी मुजफ्फरनगर नहीं लाने दिया गया। उसके शव को दौराला में सुपुर्दे खाक कराया गया। इसके बाद आज तक भी कोई भी जनप्रतिनिधि या पुलिस प्रशासन का अफसर इस पीड़ित परिवार को इंसाफ या मदद की उम्मीद जगाने के लिए घर नहीं पहुंचा।

जयंत चौधरी ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि वह उनकी आवाज को उठायेंगे और सरकार को उनके साथ इंसाफ करने के लिए विवश करेंगे। पार्टी स्तर से भी मदद दी जायेगी और सरकार से भी आर्थिक मदद दिलाने के साथ ही निष्पक्ष जांच की मांग की जायेगी। जयंत चौधरी यहां से निकलकर खालापार की गलियों में पैदल ही घूमे और लोगों से मिलकर 20 दिसम्बर की हिंसा और उसके बाद कार्रवाई को लेकर बातचीत करते हुए जानकारी जुटाई, वह खालापार में अनवार इलाही के घर भी पहुंचे। वहां पर परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 20 दिसम्बर की रात में ही उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ की, टूटी गाड़ियों को भी जयंत ने देखा और पीड़ितों को इंसाफ के लिए उन्होंने राज्य सरकार से भेदभाव छोड़कर निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था से विश्वास जगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पुलिस की लाठी से भय उत्पन्न ना किया जाये। इसके बाद वह वापस लौट गये। वापसी में ही वह खतौली नहर पर रूके, जहां सवेरे से ही रालोद नेता व कार्यकर्ता उनके आने का इंतजार कर रहे थे। उनके साथ शाहिद सिद्दीकी और वीरपाल मलिक भी मौजूद रहे। यहां से वह मेरठ के लिए चले गये। यहां से कुछ नेता भी उनके पीछे मेरठ पहुंचे। इस दौरान रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी, पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान, चौधरी योगराज सिंह, पूर्व विधायक नवाजिश आलम खां, मुश्ताक चौधरी, अभिषेक चौधरी, अनुज बालियान प्रमुख, धर्मेंद्र तोमर, पराग चौधरी, राहुल अहलावत, वीरपाल राठी, सुधीर भारतीय, पंकज राठी, वीरपाल मलिक, हर्ष राठी साहित सैंकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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