मायावती ने आजम खान को लेकर जताई सहानुभूति-शुरू हुई खुसर पुसर

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने पूर्व मंत्री आजम खान के प्रति सहानुभूति जताते हुए पहली बार अपना बयान दिया है

Update: 2022-05-12 07:26 GMT

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने पूर्व मंत्री आजम खान के प्रति सहानुभूति जताते हुए पहली बार अपना बयान दिया है। ट्विटर हैंडल पर बसपा सुप्रीमो ने ट्वीट करते हुए कहा है कि मोहम्मद आजम खान को तकरीबन सवा 2 साल से जेल में बंद रखने का मामला काफी चर्चाओं में है जो लोगों की नजर में न्याय का गला घोटना नहीं तो और क्या है?

बृहस्पतिवार को बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने आज अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से एक के बाद एक 3 ट्वीट किए हैं। पहले टवीट करते हुए मायावती की ओर से लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश एवं अन्य बीजेपी शासित राज्यों में भी कांग्रेस की ही तरह जिस प्रकार से टारगेट करके गरीबों, दलितों आदिवासियों एवं मुस्लिमों को जुल्म किया जा रहा है एवं भय आदि का शिकार बनाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। यह अति दुखद है,जबकि दूसरों के मामलों में इनकी कृपा दृष्टि जारी है।

दूसरे ट्वीट में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के प्रति सहानुभूति दिखाई है। पूर्व मंत्री आजम खान के समर्थन में आते हुए बसपा सुप्रीमो ने लिखा है कि इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने विरोधियों पर लगातार जुड़े स्कूल एवं आतंकित कार्यवाही तथा वरिष्ठ विधायक मोहम्मद आजम खान को करीब सवा 2 वर्षों से जेल में बंद रखने का मामला काफी चर्चाओं में है जो लोगों की नजर में न्याय का गला घोटना नहीं तो और क्या है?

तीसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा है कि देश के कई राज्यों में जिस प्रकार से दुर्भावना एवं विवेक पूर्ण रवैया अपनाकर प्रवासियों एवं मेहनतकश समाज के लोगों को अतिक्रमण के नाम पर भय एवं आतंक का शिकार बनाकर उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है, वह कार्यवाही को लेकर अनेकों सवाल खड़े करता है जो अति चिंतनीय भी है ।

दूसरी और बसपा सुप्रीमो की तरफ से आजम खान के प्रति दिखाई गई सहानुभूति को लेकर राजनीति के जानकार लोगों ने अपने-अपने कयास लगाने शुरू कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से बसपा सुप्रीमो ने पूर्व मंत्री को लेकर अपना बयान दिया है और कहा है कि एक धर्म और जाति विशेष के लोगों पर दोष पूर्ण रूप से सरकार कार्यवाही कर रही है, इससे मायावती यह संदेश देना चाहती है कि जिस तरह का राजनीतिक माहौल उत्तर प्रदेश में है, उसमें मुसलमान वोट बैंक अगर बसपा के साथ में आता है तो लोकसभा चुनाव में उसका पार्टी को फायदा मिल सकता है।

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