सपा मुखिया पर निकाली चंद्रशेखर ने भड़ास-कह डाली ऐसी बात

आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं होने से बुरी तरह बिफर उठे हैं

Update: 2022-01-15 06:25 GMT

लखनऊ। आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं होने से बुरी तरह बिफर उठे हैं। उन्होंने कहा है कि 1 महीने से मेरी सपा मुखिया से लगातार बात हो रही थी, लेकिन अखिलेश अपने मन में गांठ मार चुके हैं कि वह दलितों के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। सपा मुखिया ने मुझे अपमानित किया है और ऐसा लग रहा है कि वह दलितों की लीडरशिप को खड़े नहीं होने देना चाहते हैं। लेकिन हम भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए अपने दम पर चुनाव में उतरेंगे।

शनिवार को आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने राजधानी में बुलाई गई प्रेसवार्ता में समाजवादी पार्टी के साथ चल रही गठबंधन की बातों का खुलासा करते हुए कहा है कि अखिलेश अपने मन के भीतर यह गांठ मार चुके हैं कि वह दलितों के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। अखिलेश यादव भी भाजपा की राह पर चलते हुए उनके यहां खाना खाकर खेल कर रहे हैं। अखिलेश यादव को दलितों की जरूरत नहीं है, इसलिए वह दलितों की लीडरशिप भी प्रदेश में खड़ी नहीं होने देना चाहते हैं। मैंने अखिलेश यादव पर इस बात की जिम्मेदारी छोड़ी थी कि वह गठबंधन में शामिल करें या नहीं। लेकिन उन्होंने आज तक मेरी बात का जवाब नहीं दिया है। सपा मुखिया प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर भी हमारे साथ नहीं आ रहे थे। हम चाहते थे कि अखिलेश यादव हमारे मुद्दे भी गठबंधन में शामिल करें, लेकिन वह इससे लगातार बच रहे थे। इसलिए आजाद समाज पार्टी ने तय किया है कि हम गठबंधन के साथ नहीं जा रहे हैं। आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर ने कहा है कि मुलायम सिंह यादव को कांशीराम ने मुख्यमंत्री बनाया था, लेकिन उन्होंने उन्हें भी धोखा दिया। हम नहीं चाहते थे कि इस बार भी दलित समाज के साथ इस प्रकार का ही धोखा हो, इसलिये बीजेपी को रोकने के लिए मैंने अपना स्वाभिमान दाव पर लगा दिया। चंद्रशेखर ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराना हमारा लक्ष्य है और हम भाजपा को सत्ता में नहीं आने देंगे। उन्होंने कहा है कि अखिलेश को दलितों की जरूरत नहीं है, इसलिए हमने तय किया है कि अभी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे क्योंकि भाजपा के खिलाफ हमने लाठियां खाई है और हम अपने दम पर लड़ेंगे। हमारी पहली कोशिश यही रहेगी कि जो विपक्ष बिखरा हुआ है उसे इकट्ठा किया जाए। अगर सरकार बीजेपी की आती है तो दलितों और पिछड़ों को पहले की तरह इस सरकार को 5 साल और झेलना पड़ेगा और सरकार की ज्यादतियां सहन करनी पड़ेगी।



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