बर्थडे स्पेशल- सचिन अग्रवाल को बचपन से ही है सियासत का शौक

सपा जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल के जन्मदिन पर पेश है खोजी न्यूज की स्पेशल रिपोर्ट...

Update: 2022-05-28 10:28 GMT

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर की शहर विधानसभा सीट पर व्यापारी समाज में जन्म लेने वाले सचिन अग्रवाल को बचपन से ही राजनीति का शौक है। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पीड़ितों की समस्या का समाधान करने के लिये हर प्रयास करते थे और आगे भी करते रहेंगे। वर्ष 2007 में उन्होंने अपनी सियासत की गाड़ी को स्टार्ट किया था। उसके पश्चात वर्ष 2011 के जनवरी माह में सचिन अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी। सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने उन्हें सपा में शामिल होते ही जिला सचिव का दायित्व सौंपा था। उन्होंने कहा है समाजवादी पार्टी ही ऐसी पार्टी है जो जनता का कल्याण कर सकती है। सचिन अग्रवाल को विगत वर्ष ही सपा जिला कोषाध्यक्ष के पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने बताया कि सपा का ऐसा कोई भी आंदोलन नहीं है, जिसमें वह शामिल न रहे हो। सचिन अग्रवाल समाजवादी पार्टी में रहते हुए 6 से ज्यादा बार अपनी गिरफ्तारी दे चुके हैं। आईये हम सपा जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल द्वारा किये गये कुछ आंदोलनों से आपको रूबरू कराते हैं। सपा जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल के जन्मदिन पर पेश है खोजी न्यूज की स्पेशल रिपोर्ट...


सपा जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल ने बताया कि दवा व्यापारी अनुज कर्णवाल हत्याकांड में कई दिन बीत जाने के पश्चात भी खुलासा नहीं हुआ था। इस पर सपा के जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल ने कदम उठाते हुए प्रदर्शन करने का कार्य प्रांरभ किया था। इस प्रदर्शन के लिये उन्होंने सपा के वरिष्ठ नेताओं समेत सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को महावीर चौक स्थित सपा कार्यालय पर इकट्ठा किया था। सपा कार्यालय से कलेक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी दफ्तर तक सपा नेताओं ने पैदल मार्च की घोषणा की थी। इस दौरान पुलिस बल को महावीर चौक पर तैनात कर दिया गया था। सपा व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष संजय गर्ग इस प्रदर्शन के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं के साथ प्रदेश सरकार के विरूद्ध नारेबाजी करते हुए डीएम दफ्तर जाने के लिये सड़क की तरफ पहुंचे तो तैनात पुलिस बल ने सपा के इस काफिले को लाठी के दम पर वहीं रोकने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी थी। इस दौरान पुलिस बल और सपा नेताओं में काफी नौंक-झोंक हुई थी। सपा जिला कोषाध्यक्ष सहित कार्यकर्ताओं ने पुलिस के जबरन रोकने पर वहीं हंगामा स्टार्ट कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें ज्ञापन देने से जाने के लिये रोका गया तो पुलिस प्रशासन के विरूद्ध आंदोलन किया जायेगा। इसके पश्चात पुलिस अफसरों संग सपा नेताओं की वार्ता हुई थी और एक प्रतिनिधिमंडल को कलेक्ट्रेट ले जाने की बात पर सहमति बनी थी। पुलिस की कार्यवाही का निरंतर नारेबाजी कर विरोध कर रहे जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल सहित कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया गया था। उनके काफी संधर्ष के बाद इस हत्याकांड का खुलासा 12 से 13 दिन में हो गया था और हत्यारोपी को उनके अंजाम तक पुलिस ने पहुंचा दिया था।


सपा जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल ने बताया कि हाथरस कांड को लेकर प्रदर्शन के वक्त लखनऊ में समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में सैंकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ वह महावीर चौक स्थित सपा कार्यालय पर एकत्रित हुए। इसी दौरान सपा के कार्यालय से भाजपा सरकार का पुतला लेकर सरकार के विरूद्ध नारेबाजी करते हुए महावीर चौक पर पहुंच गये। इस दौरान वहां काफी पुलिस बल भी मौजूद था। सपा जिलाकोषाध्यक्ष ने सपा कार्यकर्ताओं संग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंक दिया। पुलिस सीएम योगी का पूतला फूंकता देख सपा कार्यकर्ताओं के बीच में घुस गई। इसी बीच थानों से अतिरिक्त पुलिस बल भी बुला लिया गया था। इसको लेकर सपा कार्यकर्ताओं व पुलिस के संग काफी धक्का-मुक्की हुई थी। सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस की काफी लाठियां खाने का सामना करना पड़ा था। इसके बाद पुलिस ने सीएम योगी के फूंके हुए पुतले का लाठियों से बुझाया था।


सपा जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल ने बताया कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के समर्थन में धरने में कचहरी जाने की कोशिश पर सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी के आवास से प्रमोद त्यागी सहित सपा के जिला कोषाध्यक्ष सचिन अग्रवाल को पुलिस ने अरेस्ट कर पुलिस लाइन भेज दिया था। इस पर उन्होंने सरकार को दमनकारी बताते हुए कहा था कि सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा किसानों की लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेगी चाहे प्रदेश सरकार उनका कितना भी दमन कर ले। सपा जिलाध्यक्ष सहित कई सपा के कार्यकर्ताओं को अरेस्ट कर पुलिस लाइन ले जाने पर वहीं सपा नेताओं की सभा शुरू हो गई थी। इसी दौरान उन्होंने मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए राष्ट्रपति के नाम चार सूत्रीय ज्ञापन प्रशासन को सौंपा था।

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