दिल्ली सरकार का सराहनीय प्रयास

उन्होंने डीजल पर लगने वाले वैट में 30 प्रतिशत तक की कटौती का एलान किया है।

Update: 2020-07-31 13:57 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली केे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 30 जुलाई को दिल्ली की आर्थिक स्थिति को वापस पटरी पर लाने के लिए बैठक की, जिसके बाद उन्होंने डीजल पर लगने वाले वैट में 30 प्रतिशत तक की कटौती का एलान किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की दो करोड़ जनता ने अपनी समझदारी और सतर्कता से कोरोना पर जीत हासिल की है। अब बारी है दिल्ली की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की। केजरीवाल ने आगे कहा कि दिल्ली में कई उद्योग-धंधे, फैक्टरियां आदि सब बंद हो गए हैं। बहुत से लोग बेरोजगार हो गए, लेकिन अब हमें दिल्ली की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। उन्होंने कहा कि हमारी कैबिनेट बैठक हुई है, जिसमें अहम निर्णय लिए गए हैं। दिल्ली में केजरीवाल ने डीजल पर 30 प्रतिशत तक वैट घटाने का एलान किया है जिससे, यहां डीजल 8.36 रुपये सस्ता हो गया है। जो डीजल 82 रुपये मिल रहा था वो अब 76 रुपये के आस पास मिलेगा। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में डीजल के दाम घटाने से लोगों को बजट में राहत मिलेगी, उद्योग-धंधों को मदद मिलेगी और दिल्ली की अर्थव्यवस्था को पुश मिलेगा। केजरीवाल सरकार के फैसले का असर उनके राजस्व की कमाई पर निस्संदेह पड़ेगा, पर इससे सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई आदि के खर्चों में जो कमी आएगी उससे बाजार में स्वाभाविक रूप से गति मिलेगी। महामारी के कारण जो अर्थव्यवस्था पर बुरी मार पड़ी है व महंगाई बढ़ी है, ऐसे में दिल्ली सरकार का डीजल पर से मूल्यवर्दि्धत कर यानी वैट कम करने का फैसला लोगों को बड़ी राहत पहुंचा सकता है।

कोरोना महामारी के कारण आज करोड़ों लोग अपने रोजगार से हाथ धो बैठे हैं। लॉकडाउन को अनलॉक करने से लोग फिर से रोजगार की तलाश में या नौकरी पर जाने के लिए यात्राएं कर रहे हैं, लेकिन पिछले कई दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जिससे लोगों की परेशानियां बढ़ीं हैं। तो वहीं दूसरी ओर केंद्र व राज्य सरकारें इससे व्यापक राजस्व कमा रही हैं, जिसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता है। पेट्रोल-डीजल राज्य और केंद्र सरकारों के लिए कमाई के मोटे स्रोत होते हैं। दूसरी तरफ, पेट्रोलियम कंपनियां तो कारोबार ही मुनाफे के लिए कर रही हैं। तो वे भला कमाई क्यों न करें, तो इसीलिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। शराब और पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स कई राज्यों का राजस्व का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा होता है। इसकी वजह से जब लॉकडाउन में राजस्व की भारी तंगी हो गई तो राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाना शुरू किया और कई राज्यों में शराब की बिक्री खोल दी गई। मई के महीने में पहले हफ्ते में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों ने डीजल पर वैट बढ़ाया था।

तेल के दाम इस कदर क्यों बढ़ रहे हैं? इस सवाल का सीधा सा जवाब ये है कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें रेवेन्यू के लिए पेट्रोल और डीजल के टैक्स पर काफी हद तक निर्भर हैं। लॉकडाउन के दौरान देश भर में पेट्रोल और डीजल की मांग तेजी से घटी और इसलिए सरकार के रेवेन्यू में भी तेजी से गिरावट आई है। लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप सी हो गई हैं और इससे राष्ट्रीय खजाना बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौजूदा वक्त में टैक्स के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्रोत लगभग खत्म हो गए हैं, ऐसे में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स को बढ़ाकर आर्थिक प्रबंधन ठीक करने की कोशिश की जा रही है। तेल पर टैक्स बढ़ाने के कुछ फायदे भी हैं। जैसे कि इससे बेकार में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आती है। चूंकि भारत कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर है ऐसे में ये पेट्रोल-डीजल के बेतहाशा इस्तेमाल को फिलहाल बर्दाश्त नहीं कर सकता। मई में ही केंद्र सरकार ने भी पेट्रोल पर एक्साइज में 10 रुपये लीटर और डीजल पर एक्साइज में 13 रुपये लीटर की सीधे बढ़त कर दी थी। इसके पहले केंद्र सरकार ने 14 मार्च को पेट्रोल-डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। रुपये में गिरावट की वजह से तेल कम्पनियों की चिंता बढ़ी क्योंकि इसका मतलब यह है कि अब उन्हें कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ेगा। इसलिए तेल कंपनियां लगातार इसका बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं। यानी जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत ज्यादा होगी तो भारत में भी तेल की कीमत में बढ़ोतरी होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कम होने पर भारत में भी कटौती की जाएगी। सीधे शब्दों में कहें तो पेट्रोल और डीजल के लिए हम जो कीमत चुकाते हैं उसमें 70 फीसदी के लगभग टैक्स होता है और कुछ नहीं।

देश में लाॅकडाउन हटने और आनलाॅक होने के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में कभी लगातार तो कभी रुक-रुक कर बढ़ोतरी जारी है। जहां देश में तेल की कीमतें साल के उच्चतम स्तर पर हैं वहीं पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने नया रिकार्ड तब बना डाला जब आश्चर्यजनक रूप से डीजल की कीमतें पेट्रोल की कीमतों को पार कर गई। अमूमन डीजल की कीमत पेट्रोल से कम होती है। गत 7 जून के बाद से जहां डीजल के दाम लगातार 22 दिनों तक बढ़े हैं, वहीं पेट्रोल के दाम 21 दिन बढ़े हैं। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों की आंच अब किचन तक भी पहुंच चुकी है। सब्जियों में महंगाई का तड़का लग चुका हैं और अब सब्जियां महंगी होती जा रही हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग पर ही पड़ने वाला है। निम्न वर्ग को तो सरकार नकद के साथ गैस सिलेंडर और राशन अब भी दे रही है लेकिन मध्यम वर्ग की समस्या जस की तस है। डीजल के दामों में आई तेजी निश्चित तौर पर मंहगाई को बढ़ाने का काम करेगी और इसका असर जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी से न केवल आम उपभोक्ता को बल्कि ट्रांसपोर्ट यूनियन भी नाखुश हैं। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से पूरी आर्थिक गतिविधियां डगमगा रही हैं। तेल के दाम बढ़ने से ढुलाई महंगी हो गयी है। माल ढुलाई बढ़ने से फल और सब्जी जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों की कीमत में उछाल आना तय है। वहीं, रोजमर्रा के उपयोग के सामान की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण माल ढुलाई में इजाफे का असर एक साथ पूरे देश पर दिखाई देगा। इससे एफएमसीजी कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और वे कीमतों में बढ़ोतरी को मजबूर होंगी। फल और सब्जियों की कीमतों में ढुलाई का हिस्सा दूसरी वस्तुओं के मुकाबले ज्यादा होता है। दरअसल, अलग-अलग किसानों के पास कम मात्रा में फल-सब्जी होती हैं। उन्हें अपने उत्पाद मंडी तक पहुंचाने में बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ता है। फलों के मामले में हालात कुछ ज्यादा ही अलग हैं। ऐेसे में ये मान कर चलिए कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई की ओर बढ़ने की वजह से अगले दिनों में महंगाई का तगड़ा झटका जनता को लगने वाला है। खासकर डीजल का रेट बढ़ना ज्यादा नुकसानदेह है। भारत में डीजल का इस्तेमाल कृषि, ट्रांसपोर्ट जैसे जरूरी काम में किया जाता है। डीजल के रेट बढ़ने से कृषि पैदावार के रेट बढ़ेंगे और तमाम सामान की ढुलाई भी बढ़ जाएगी। ट्रकों का भाड़ा बढ़ जाएगा। इसकी वजह से महंगाई बढ़ने के पूरे आसार हैं। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के इस छोटे से प्रयास से जनता को मंहगाई से पूरी तरह तो राहत नहीं मिलेगी लेकिन कुछ राहत तो जरूर मिलेगी।

(नाज़नींन-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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